Thursday, September 29th, 2022

भारत में सोलर एनर्जी को बढ़ाने पर जोर, स्‍वदेशी बनाने में आएगा इतना मोटा खर्च : Lokmat Daily

भारत में सोलर एनर्जी को बढ़ाने पर जोर, स्‍वदेशी बनाने में आएगा इतना मोटा खर्च : Lokmat Daily

नई दिल्‍ली. परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के घटते जाने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के लिए भारत ही नहीं पूरे विश्‍व में जोर दिया जा रहा है. भारत में भी सोलर एनर्जी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कोशिशें की जा रही हैं लेकिन सौर ऊर्जा विनिर्माण को स्‍वदेशी बनाने के लिए देश में मोटे निवेश की जरूरत पड़ेगी. सौर विनिर्माण की वैल्यू चेन को स्वदेशी बनाने के लिए अगले 3-4 वर्षों में 7.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (53,773 करोड़ रुपये) के पूंजीगत निवेश की जरूरत पड़ेगी. यह बात सीईईडब्ल्यू-सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (सीईईडब्ल्यू-सीईएफ) के स्वतंत्र अध्ययन ‘मेकिंग इंडिया ए लीडर इन सोलर मैन्युफैक्चरिंग’ में सामने आई है.

गुरुवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से घरेलू सोलर मॉड्यूल निर्माताओं को 2030 तक 30 बिलियन अमरीकी डॉलर (2.3 लाख करोड़ रुपये) (15 रुपये/ वाट पीक की दर से 150 गीगावाट बिजली की बिक्री से) राजस्व हासिल करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, यह लगभग 41 हजार श्रमिकों के लिए नए रोजगार भी पैदा कर सकता है.

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के प्रोग्राम लीड ऋषभ जैन ने कहा, ‘2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म-आधारित क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य पाने और दीर्घकालिक नेट-जीरो महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा एक आधारशिला की तरह है. वर्तमान में जारी भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट इस बात का संकेत दे रहे हैं कि ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता घटाई जाए और ऊर्जा क्षेत्र में बदलावों के लिए प्रमुख उद्योगों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद घरेलू सप्लाई चेन तैयार की जाए. वैश्विक स्तर पर कई देश अपनी सोलर सप्लाई चेन में विविधता लाने के लक्ष्य तय कर रहे हैं.’

उन्‍होंने आगे कहा, यह भारत के लिए शोध एवं विकास (आर एंड डी) और सप्लाई चेन में उत्पादों के स्वदेशीकरण के लिए वैश्विक साझेदारियां करने के लिए एक अच्छा अवसर है. इस दिशा में भारत की ओर से उठाए गए कदम अन्य अर्थव्यवस्थाओं में स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक लचीली घरेलू सप्लाई चेन को बनाने के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में काम करेंगे. अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों को आपस में साझेदारी करनी चाहिए और इस क्षेत्र में कुशल पेशेवर उपलब्ध कराने के लिए संस्थानों के सह-निर्माण के लिए आगे आना चाहिए. एक खुशहाल घरेलू सौर विनिर्माण उद्योग न केवल सस्टेनेबिलिटी बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास को भी मजबूत करेगा.

घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में कई सहायक उपायों की घोषणा की थी. इनमें उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 3.2 बिलियन अमरीकी डालर (24,000 करोड़ रुपये) का आवंटन और सोलर सेल के आयात पर 25 प्रतिशत व सोलर मॉड्यूल के आयात पर 40 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) लगाने के उपाय शामिल हैं। सीईईडब्ल्यू-सीईएफ के अध्ययन ने यह भी रेखांकित किया है कि ऐसे उपायों को इस क्षेत्र से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और विनिर्माण क्षमता के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा भी हुई है.

‘मेकिंग इंडिया ए लीडर इन सोलर मैन्युफैक्चरिंग’ यह भी सुझाव देती है कि सौर विनिर्माण के लिए अधिक आवंटन, एक समर्पित सरकारी अनुभाग और एक सलाहकारी समिति के साथ एक परिणामोन्मुख अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) कार्यक्रम बनाना चाहिए. सरकारों को केंद्रीकृत आरएंडडी ढांचा बनाने, औद्योगिक आरएंडडी सुविधाएं स्थापित करने के लिए पूंजीगत व्यय पर सब्सिडी देने और निर्माताओं को अपने राजस्व का एक हिस्सा आरएंडडी पर खर्च करने को अनिवार्य बनाने पर विचार करना चाहिए. बाजार के लिए व्यवहारिक रास्ते उपलब्ध कराने के लिए इन उपायों के बाद स्टार्टअप के वित्त पोषण और मांग की गारंटी देनी चाहिए. भारतीय ऋणदाताओं को सौर निर्माताओं के लिए किफायती दर पर ऋण उपलब्ध कराने में पर्याप्त बढ़ोतरी करने की जरूरत है.

इसके अलावा, वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए, सरकारों को भारत एक्ज़िम बैंक के जरिए विकासशील देशों में सौर परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण को विस्तार देना चाहिए. राज्य सरकारों को भी जमीन की लीज दरों को कम रखकर, उत्पादन के लिए हरित ऊर्जा सुलभ बनाने, और उद्योगों के लिए कुशल श्रमिकों की निरंतर आपूर्ति के साथ स्थानीय स्तर पर विनिर्माण केंद्रों को स्थापित करने में मदद करनी चाहिए.

Tags: Solar power plant

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